हे माँ एक भुला हुआ रही हु मैं चल रहा रहा हूँ लड़खड़ा के गिर जा रहा हूँ पर गिर के भी चलता जा रहा हु मैं इस हालात मे इस बालक का कहारा सुन ले तू हे माँ एक भुला हुआ राही हूँ मैं अपने अचल का सहारा देदे तू लोग कहते है दूर मंजिल है तेरी पर कोई मंजिल दूर नही होती है ये जाना है मैंने एक मुसीबत है मेरी इस मुसीबत का नजारा देदे तू हे माँ एक भुला हुआ राही हूँ मैं अपने अचल आ सहारा देदे तू समल जायेंगे तेरे इस ऐसान से तेरे एहसानो पर लड़ा जा रहा हु मैं इस बच्चे की खता है एक उस खता का हिदायत दे दे तू हे माँ एक हुआ राही हूँ मै अपने अचल सहारा दे दे तू https://www.blogger.com/blogger.g?blogID=8598039121254768705#editor/target=post;postID=1688549130851928865;onPublishedMenu=allposts;onClosedMenu=allposts;postNum=1;src=link
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